मेरा नाम धर्मिला आहिर है।
मैं कच्छ के छोटे से गाँव कोटाय में रहती हूँ।
बचपन से ही मैंने पारंपरिक आहिर कढ़ाई का काम देखा और सीखा,
पर मेरे मन में हमेशा यह इच्छा रही कि मैं कुछ अलग करूँ,
कुछ ऐसा जो अनोखा हो और मेरी पहचान बने।
मैंने ठान लिया कि कढ़ाई को केवल कपड़ों तक सीमित न रखूँ—
बल्कि इसे कला बना दू